अंत अनंत साधन करै
Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली
Verse 5 of 8
प्रिया चरण सौं भई है, अंकित अवनि रसाल।
सो रज बंदत रसिक पिय, लोटत करत निहाल॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.38)
प्रिया चरण छोटे भाई हैं, अंकित अवनि रसाल हैं। सो राज बंधत रसिक पिया, लूटत लूटत नहल.. - श्री अनन्या अली, वाणी श्री अनन्या अली जी, श्री वृन्दावन निवासी प्रदेश (2.38)