अंत अनंत साधन करै

Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली

Verse 6 of 8

रस जस सुनि श्री विपिन के, गुन गन करौं सु गान। लोटो रज में मगन ह्वै, इहि सम सुख नहि आन॥ - श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.71) श्रीविपिन सार सुनो गुण गण सु गण। आइए हम राज्य में लीन हो जाएं, इसमें कोई सुख नहीं है.. - श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी के शब्द, श्री वृन्दावन धाम (2.71)
अंत अनंत साधन करैअंत अनंत साधन करै