रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन

Vrindavipun Vilasa — श्री किशोर दास

Verse 5 of 8

मंगल मनि आनंद निधि, परम प्रेम रस रूप। ऐसे वृंदाविपिन की, उपमा अमित अनूप॥ - श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (14) मंगल मणि आनंद निधि, परम प्रेम रस रूप। ऐसी है वृन्दाविपिन की उपमा, अमित अनुप.. - श्री किशोर दास, श्री वृन्दाविपुण विलास (14)
रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंनरसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन