श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 100 of 139
(राग कान्हरो)
श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित।
और सबै स्वारथ के संगी, गुर चोपरी दै पोषत पितु॥ [1]
यह मैं जानि सबनि सौं तोरी, तुमसौं जोरी दै चरनन चितु।
इतनी आस व्यास की पुजवहु, ज्यौं चातिक पोषत पावस-रितु॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (288)
(राग कान्हारो) श्रीराधावल्लभ, तुम मेरे हिट हो. और सब हितैषियों के मित्र, गुड़ की दुकान के प्रिय पिता.. [1] यहाँ मैं सब सौ बातें जानता हूँ, तुम्हारे चरणों का बल। इतानि अस व्यास की पूजावहु, ज्यूं छितिक पोस्थ रैना-ऋतु। [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (288)