ललनकी बतियाँ चोज सनी

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 99 of 139

(राग कल्याण एवं राग विहाग) ललनकी बतियाँ चोज सनी। परम कृपाल चितै करुनामय, लोचन कोर अनी॥ [1] उमगि ढरे दोऊ सुरत सेज पै, टूटी तरकि तनी। परमउदार व्यासकी स्वामिनि, वकसति मौज घनी॥ [2] - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (273) (राग कल्याण एवन राग विहागा) लालंकी बतियाँ छोज सानी। परम कृपाल चितै करुणामय, लोचन कोर आनि.. [1] उमागि धारे दू सुरत सेज पै, टूटी तारकि तानी। परमुद्रा व्यासकी स्वामिनी, वाकसति मौज घनी.. [2] - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, स्वर्गीय (273)
किशोरी मोहि अपनी कर लीजैश्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित