किशोरी मोहि अपनी कर लीजै
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 101 of 139
(राग गौरी)
एक पकौरी सब जग छूट्यौ ।
जप, तप, व्रत, संजम करि हारें, नैंकु नहीं मन टूट्यौ॥ [1]
माया रचित प्रपंच कुटुंबी, मोह-जाल सब छूट्यौ।
व्यास गुरू हरिवंश कृपा तें, वसि वनराज प्रेम रस लूट्यौ॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (300)
(राग गौरी) एक गुलगुला सारी दुनिया को तबाह कर देगा. जप, तप, व्रत, संजम करि हरेन, नैनकु नहिं मन टूटयौ..[1] संसार माया से रचा गया है, सब भ्रम छोड़ दो। व्यास गुरु हरिवंश कृपा तेन, वासी वनराज प्रेम रस लुट्यौ.. [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (300)