झूलत फूलत कुंजविहारी

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 102 of 139

(राग मलार) झूलत फूलत कुंजविहारी। दूसरी ओर किसोरवल्लभा श्रीवृषभान दुलारी॥ [1] कुलकत हँसत खसत कुसुमावलि सुंदर झूमक सारी। कबहुँक पटतरि झुलवति गावति प्यारिहि पिय रसिया री॥ देखति नैंन सफल करि खेलत, कोटि व्यास वलिहारी॥ [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (321) (राग मलारा) झूलत फुलत कुंजविहारी। द्वितीय या किशोरवल्लभ श्रीवृषभान दुलारी.. [1] कुलकट हंसत खसत कुसुमावली सुन्दर झुमका साड़ी। कबहुंक पतातरी झूलावति गावति पियारिहि पिया रसिया री.. देखति नयन सफल करि खेलत, कोटि व्यास वलिहारी.. [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, स्वर्गीय (321)
किशोरी मोहि अपनी कर लीजैचलि चलिहि वृंदावन वसंत आयौ