ऐसो कब करिहौ मन मेरौ
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 107 of 139
(राग देवगंधार)
ऐसो कब करिहौ मन मेरौ।
कर करुआ कामरि कांधे पै, कुंजन मांझ बसेरौ॥ [1]
ब्रजवासिन के टूक भूख में, घर घर छाछ महेरौ।
भूख लगै जब मांग खाऊँगो, गनौं न सांझ सबेरौ॥ [2]
रास विलास वृत्ति करि पाऊँ, मेरे खूँट न खेरौ।
व्यासदास होय वृन्दावन में, रसिक जनन को चेरौ॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (102)
(राग देवगंधार) तुम मेरे हृदय को कब प्रसन्न करोगे? करुआ कामरि कान्हे पै, कुंजन मंज बसेरौ।।[1] भूख में ब्रजवासिन के छंद, घर-घर में छाछ। भूख लगने पर खाना मांगें, शाम या सुबह नहीं। व्यासदास वृन्दावन में हैं, चेरु रसिक जनन के स्वामी हैं। [3] - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (102)