खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 115 of 139
कोटि ब्रह्म ऐश्वर्यता, वैभवता की वारि।
व्यासदासकी कूँवरिकौं, अब को सकै निहारि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (32)
कोटि ब्रह्मा ऐश्वर्य, धन और वैभव। व्यासदास की अविवाहित पत्नी अब मेरी ओर देख भी नहीं सकती। - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (32)