खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 12 of 139
धर्म मिट्यौ अब कृपा करि, दई भजन रसरीति।
रसिक कुंवर दोउ लाड़िले, व्यासहि बाढ़ी प्रीति॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (12)
अब मेरे धर्म को प्रसन्न करो, यह स्तोत्र रसृति है। रसिक कुँवर दोउ लड़ाइले, व्यासहिं बधाई प्रीति.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (12)