खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 120 of 139

मन रति वृन्दावन से कीजै,वर्षत स्यामा-स्याम-रस, 'व्यास' नैन भरी पीजै॥ - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (24) दिल को वृन्दावन से प्यार हो गया, बरसे स्याम-स्याम-रसा, 'व्यास' की आँखें भारी... - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (24)
कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार