खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 121 of 139
मोसो पतित न अनत समाई, याहि तें मैं वृन्दावन की सरन गह्यो है आई।”
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (17)
पापियों का कोई अंत नहीं है, मैं यहाँ वृन्दावन में शरण लेता हूँ।” - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्द्ध (17) मेरे समान पतित कोई नहीं, यह झूठ है, मैंने वृन्दावन में शरण ली है।