खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 130 of 139
तजि के रसिक अनन्यता, विधि निषेध दे घेरि।
व्यासदास के भाव ते, भक्ति गई दै टेरी॥
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (100)
ताजी की रोमांटिक विशिष्टता कानूनी निषेधों से घिरी हुई है। व्यासदास के भव ते, भक्ति गई दई तेरी.. - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (100)