खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 131 of 139
वैर करै हरिभक्तसौं, मित्र करै संसार।
भक्त कहावै आपते, मिटै न जमकौ द्वार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (140)
हरि भक्त बैरी हो जाते हैं, जगत मित्र हो जाता है। भक्त कहता है, मुझे द्वार से मत मिटाओ.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (140)