खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 136 of 139
व्यास बढाई और की, मेरे मन धिक्कार।
रसिकन की गारि भली, यह मेरौ श्रृंगार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (35)
उन्होंने व्यास को बधाई देते हुए कहा, मेरा मन शापित है। रसिकन का गाना अच्छा है, ये मेरा श्रृंगार है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सखी (35)