खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 15 of 139
व्यास कुलीननि कोटि मिलि, पंडित लाख पचीस।
स्वपच भक्तकी पानहीं, तुलै न तिनके सीस॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (16)
व्यास कुलीनानी करोड़ रूपया, पंडित लाख पच्चीस। भक्त का सच्चा स्वरूप आश्रय है, तिनका नहीं, तिनका नहीं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (16)