खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 21 of 139
मन रति वृंदावन सौ कीजै।
खायौ पीयौ भर्यौ भूँज्यौ, अब जीवन कौ फल लीजै॥ [1]
काज अकाज जानि सब आपुनौ, दाउ सँवारौ दीजै।
देखि धेनु सुनि बैनु रैनु तजि, धृक-धृक जग जौ जीजै॥ [2]
जमुना तट वंसीवट निकट, रहत जु यह तन छीजै।
वरषत स्यामास्याम रास रस, व्यास नैंन भरि पीजै॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (24)
मेरा हृदय वृन्दावन से भर गया है। खाओ, पीओ, खाओ, खाओ, खाओ, अब आपको जीवन के किस फल का आनंद लेना चाहिए? देखि धेनु सुनि बैनु रैनु तजि, ध्रिका-ध्रिका जग जौजाजै। [2] पास-पास हैं यमुना के किनारे, रहत जू ये तन छिजाई। वर्षत संयमस्य रस पियें, व्यास नानन भारी रस। [3] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (24)