खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 25 of 139

कोटि ब्रह्म ऐश्वर्यता, वैभवता की वारि। व्यासदासकी कुंवरिकौ, अब को सकै निहारि॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (32) कोटि ब्रह्मा ऐश्वर्य, धन और वैभव। व्यासदासकि कुँवरिकौ, अब देखो साकै। - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (32)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार