खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 27 of 139
खरौ-खरौ सब लेत हैं, परखि पारखू सार।
खोटे ‘व्यास’ अनन्य कौ, गाहक नंदकुमार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (34)
हर कोई देर से है, हर चीज़ देर से है। और ग़लत कौन है 'व्यास', ग्राहक नंदकुमार.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सखी (34)