खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 32 of 139

मुहरैं मेवा अनत के, मिथ्या भोग विलास। वृंदावन के स्वपच की, जूँठनि खैयै व्यास॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (42) अनंत काल के फल झूठे सुख और विलासिता की मुहर हैं। वृन्दावन के स्वप्न की, जुंठनि खैयै व्यास.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत साखी (42)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारकहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँ