खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 34 of 139

व्यास मिठाई विप्र की, तामें लागै आगि। वृन्दावन के स्वपच की, जूठनि खैयै मागि॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (44) व्यास मीठे क्रोध की अग्नि में जल गये। वृन्दावन की निज वाणी, जुठानी खैयै मागी.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (44)
कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार