खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 35 of 139

व्यास स्वपच बहु तरिगए, एक नाम लवलीन। चड़े नाव अभिमान की, बूड़े बहुत कुलीन॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (47) व्यास स्वपच बहु तारिगे, एक नाम लवलीन। छोटे स्वाभिमानी, बड़े श्रेष्ठ.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत मित्र (47)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार