प्यारी तेरे वदन-कमल-रस अटक्यौ
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 39 of 139
(राग नट)
प्यारी तेरे वदन-कमल-रस अटक्यौ लालन अलि।
तनसौं तन मनसौं मन अरुझ्यौ न सकतु चलि॥ [1]
तुव वृंदावन कनक बेलिसी रही उरजनि फलि।
यह सुख निरखत व्यासदास जाइ बलि॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (53)
(राग नाता) प्यारी तेरे वदना-कमला-रस अटक्यौ लालन अली। तनसौं तन सावन मन अरुझ्यौ न सकातु चाली।।[1] तुव वृन्दावन कनक बेलिसि रही उर्जनि फली। याह सुख निरखत व्यासदास जय बलि.. [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (53)