महिमा स्याम की हम जानी
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 41 of 139
(राग धनाश्री)
महिमा स्याम की हम जानी।
जिहिं प्रताप वृंदावन सेवत
मोहू से अभिमानी॥
हमहूँसेन कृपाकरी दैहैं
दरशन राधारानी।
व्यासदासि नव केलि विलोकत,
बिनहीं मोल विकानी॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (54)
(राग धनाश्री) महिमा स्याम की हम जानी। जहाँ प्रताप को वृन्दावन के भक्तों की सेवा करने में गर्व है। राधारानी हम पर दयालु हैं। व्यासदाससि नव केलि विलोकत्, बिनहिं मोल विकनि.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (54)