खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 42 of 139

व्यास सदा हरिजन बड़े, जिनकौ हृदय गंभीर। अपनों सुख चाहत नहीं, हरत पराई पीर॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (55) व्यास सदैव एक महान हरिजन हैं, जिनका हृदय ज्ञान से भरा है। मैं अपना सुख नहीं, किसी और का दुःख चाहता हूँ.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (55)
महिमा स्याम की हम जानीश्रीराधा प्यारी के चरनारविंद सीतल सुखदाई