खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 48 of 139
व्यास बड़े हरिके जना, जिनके हरि आधार।
निसिदिन हरिके भजन में, घटत न कबहुँ प्यार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (59)
व्यास एक महान हरित पुरुष हैं, जिनका हरित आधार है। निसिदिन हरिके भजन मन, घट न कबहुं प्यार.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (59)