खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 57 of 139
वेद पुराण हूँ पढै, करैं सुकर्म संजोई।
व्यास जु जनम अनन्य बिनु, एकौ गति नहीं होइ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (73)
मैंने पुराने वेद पढ़े हैं और अपने अच्छे कर्मों को संजोया है। व्यास के जन्म में अनेक बिंदु हैं, गति एक भी नहीं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (73)