खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 60 of 139
आसू कौ हरिदास रसिक हरिवंश न मोहिं बिसारौ।
यहि पथ चलत स्याम-स्यामा के व्यासहिं बोरौ भावे तारौ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (80)
AASU के हरिदास रसिक हरिवंश और मोहिन बिसराऊ. याहि पथ चलत स्याम-स्याम के व्यासहिं बोरौ भावे तरौ.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (80)