किशोरी मोहि अपनी कर लीजै

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 61 of 139

(राग गौरी) सुभग सुहाग को चिनौं प्यारी तेरे चरननि सोहै। जिनकी रज राजत वृन्दावन, देखत ही मोहन मनमोहै॥ [1] गौर अङ्ग छबि श्यामहि फबि गई, सकल लोक चूड़ामनि जोहै। व्यास स्वामिनी की उपमा कौं भुवनचतुर्दस कामिनि कोहै॥ [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (81) (राग गौरी) आपका दाम्पत्य मंगलमय हो प्रिय सोहाई। जिसका राज्य चाँदी है, वृन्दावन, जिसे देखूँ तो मोहन आकर्षित हो जाता है। व्यास स्वामिनी उपमा कौन भुवन चतुर्दश कामिनी कथा.. [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तराखंड (81)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार