खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 62 of 139
साधुन की सेवा कियैं, हरि पावत संतोष।
साधु विमुख जे हरि भजैं, व्यास बढ़ै दिन रोष॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (82)
संतो की सेवा की, हरि पावत संतोष। साधु विमुख जे हरि भजन, व्यास बधाई दीन रोश.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (82)