खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 66 of 139

व्यास दीनता के सुखहि, कह जानैं जग मंद। दीन भये तें मिलत हैं, दीनबंधु सुखकंद॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (95) व्यास दिन में खुश रहते हैं, कहते हैं दुनिया धीमी है। दीन भये दस मिलत हैं, दीनबंधु सुखखंड.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (95)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारव्यास न कबहूँ उपजि है