व्यास न कबहूँ उपजि है

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 67 of 139

व्यास न कबहूँ उपजि है, विषयिनि कैं अनुराग। साधु-चरन रज पान बिनु, मिटै न उरकौ दाग॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (96) कह व्यास जन्मा नहीं, कह अनुराग विशिनी। साधु चरण रज पान बिनु, मिठाई न उरकौ दग.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (96)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारमहिमा स्याम की हम जानी