खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 7 of 139
व्यास न व्यापक देखिये, निर्गुण परै न जानि।
तब भक्तनि हित औतरे, (श्री) राधावल्लभ आनि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (07)
उन्हें व्यास के समान व्यापक मत देखो, उन्हें सद्गुणों से रहित किसी अन्य व्यक्ति के रूप में मत देखो। तब भक्त हित आया, (श्री) राधावल्लभ अनी.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (07)