खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 8 of 139
व्यास भक्ति कौ फल लहयौ, वृन्दावन की धूरि।
हित हरिवंश प्रताप तें, पाई ज़ीवनी मूरि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (8)
व्यास भक्ति का फल है, वृन्दावन की धुरी है। हित हरिवंश प्रताप तेन, पै जैवाणी मुरि.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (8)