खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 87 of 139
महाप्रलै अबही भई, वृंदावन करि वास।
पर्यौ रहै निहचिंत मन, छाँड़ि जगतकी आस॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी,साखी (144)
अब भाई तू वृन्दावन में निवास कर। मेरा मन शांत है, कविता संसार का सत्य है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (144)