कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँ

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 89 of 139

(राग सारंग) गावत प्यारौ राधा तेरौ जसु। तेरौई नाम जपत और बिलपतु है, कामकौ स्यामहिं संक सु॥ [1] कह्यौ न परै दारुन दुख प्यारी, तेरे विरह मोहन के कंठ रह्यौ असु। व्यासस्वामिनी करुनाकरि राख्यौ, हरि चाख्यौ अधर-सुधारसु॥ [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (170) (राग सारंगा) गावत प्यारौ राधा तेरौ जसु। जपत बिलापतु नाम तुम्हारा, कामकौ स्यामहिं सनक सु।। [1] अपने प्रियतम की वेदना मुझे मत बताओ, तुम्हारे आंसू मोहन के गले में ही रह जाते हैं। व्यासस्वामिनी करुणाकारी राखौ, हरी चख्यौ अधरा-सुधारसु.. [2] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, स्वर्गीय (170)
नाँचत गोपाल वनैं नटवर वपु काछैंश्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित