श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 90 of 139
(राग कान्हरो)
ऐसौ काकौ भाग जु दिन प्रति,
स्यामा स्यामहि रुचिसौं गावै। [1]
जाकी चरन सरन ह्वै रहियै,
तौ वृंदावन स्याम बसावै॥ [2]
जूँठनि तौ ताही की खैयै,
पाप, ताप, तन दूरि नसावै। [3]
व्यास दास ताही के हूजौ,
जाहि भक्ति बिनु और न भावै॥ [4]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (172)
(राग कान्हारो) ऐसौ काकौ भाग जू दिन प्रति, स्याम स्यामहि रुचिसौं गावै। [1] मेरे चरणों में रहोगी तो वृन्दावन में बस जाओगी श्यामा। [2] जून में इतना खायेंगे तो पाप, पश्चाताप और शरीर तीनों आपसे दूर रहेंगे। [3] व्यास दास ताहि के हुजौ, जाहि भक्ति बिनु और न भवै.. [4] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (172)