कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँ
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 91 of 139
(राग सारंग)
नैननि देख्यौ, सोई भावै।
जोई कपट लोभ तजिकै (श्री) राधावल्लभकै गुन गावै॥ [1]
रसिक अनन्य भक्ति मंडलकी मीठी बात सुनावै।
ताके चरन शरन ह्वै रहिये, दिन प्रति रास दिखावै॥ [2]
स्यामास्याम करैं सोई जो, व्यासदास सुख पावै॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (232)
(राग सारंगा) नानिनी, देखो, तुम सो रहे हो भाई। जो लोग धोखेबाज, लालची हैं, वे (श्री) राधावल्लभाकै की स्तुति गाते हैं.. [1] रसिकों और अन्य भक्ति संप्रदायों के मधुर शब्दों को सुनो। भक्त के चरणों में रहो और अपना कल्याण करो। [2] व्यासदास, जो संयमपूर्वक सोएगा, उसे सुख प्राप्त होगा। [3] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (232)