राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 10 of 29

जहाँ जुगल मंगलमयी, करत निरंतर वास। सेऊँ सो सुख रूप श्री, वृन्दाविपिन विलास॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (10) जहां चबाना शुभ होता है वहां निवास निरंतर बना रहता है। स्यूं सो सुख रूप श्री, वृंदाविपिन विलास.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (10)
मदनगुपाल सरन तेरी आयौराधामाधव अद्भुत जोरी