राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 11 of 29

जनम-जनम जिनके सदा, हम चाकर निसि भोर। त्रिभुवन पोषन सुधाकर, ठाकुर जुगल किसोर॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (7) जिनकी सेवा हम हर सुबह, जन्म-जन्मांतर तक करते हैं। त्रिभुवन पोषण सुधाकर, ठाकुर जुगल किशोर.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (7)
राधामाधव अद्भुत जोरीलड़ैती के खंजन लोचना