राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 13 of 29

लोचन स्याम सुधीर के, मोचन विरह विसाल। बिन ही अंजन ये अहो, खंजन लोचन बाल॥ - श्रीभट्ट देवाचार्य, युगल शतक (63) लोचन स्याम सुधीर के, मोचन विरह विसल। बिन ही अंजन ये अहो, खंजन लोचन बल.. - श्रीभट देवचारी, दोहरा शतक (63)
लड़ैती के खंजन लोचनाराधामाधव अद्भुत जोरी