राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 20 of 29

साँवर ससि सँग लसि प्रिया, भरी सरस रस छंद। डोलत हैं श्रीराधिका, अति ही आजु आनंद॥ - श्रीभट्ट देवाचार्य, युगल शतक (67) संवर ससि संग लसी प्रिया, भारी रस रस छंद। श्रीराधिका आज उत्साहित हैं, बहुत खुश हैं.. - श्रीभट देवचारी, दोहरा शतक (67)
राधामाधव अद्भुत जोरीब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि