राधामाधव अद्भुत जोरी
Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य
Verse 22 of 29
सेव्य हमारे हैं सदा, बृन्दाबिपिन बिलास।
नंदनँदन बृषभानुजा, चरन अनन्य उपास॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (5)
वह सदैव हमारा है, बृंदाबिपिन बिलास। नन्दनन्दन बृषभानुजा, चरण अनन्य उपास.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (5)