राधामाधव अद्भुत जोरी
Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य
Verse 23 of 29
सेव्य हमारे हैं सदा, वृन्दाविपिन बिलास।
नंदनंदन वृषभानुजा, चरन अनन्य उपास॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (3)
वह तो सदा मेरा है, वृन्दाविपिन बिलास। नन्दनन्दन वृषभानुजा, चरण अनन्य उपास.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (3)