राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 25 of 29

स्यामा स्याम सरूप सर, परि स्वार्थ बिसरयौ जु। जाकौ मन आनन्दघन, वृन्दाविपिन हरयौ जु॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (2) स्याम का सार स्याम जैसा है, स्वार्थ से भरा है संसार। जाकौ मन आनंदघन, वृंदाविपिन हरयौ जु.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (2)
श्री वृन्दाविपिनेस्वरी रस सिन्धु बिहारीराधामाधव अद्भुत जोरी