राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 26 of 29

ठाढ़े गाढ़े कुंज तर, बाढ़े मैन मरोर। भीजत कब इन दृगन ते, देषौं जुगल किसोर॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (88) तालाब पानी से भरे हैं, उन्हें बड़ा बनाऊंगा. कब मिलता है सुकून इस दुनिया में, क्यों नहीं लड़ते हालातों से.. - श्री भट्ट देवाचार्य, डबल सेंचुरी (88)
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