राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 27 of 29

(दोहा) भुवन चतुर्दस की सबै, सुंदरता सिरमौर। सुंदर वर जोरी बनी, वृन्दावन निज ठौर॥ (पद) [राग-केदारौ, तीनताल] वृन्दावन इक सुन्दर जोरी। खेलत जहाँ तहाँ बंशीवट, नंदनँदन वृषभानु किसोरी॥ भुवन चतुर्दस की सुन्दरता, सुन्दर स्याम राधिका गोरी। जै श्रीभट कहाँ लौं बरनौं, रसना एक नाहिं लख कोरी॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (58) (दोहा) भुवन चतुर्दस सब, सुन्दर सिरमौर। सुन्दर वर जोरी बानी, वृन्दावन मेरा धाम है.. (पद्य) [राग-केदारौ, तिनताल] वृन्दावन सुन्दर जोरी है। बंशीवट बज रहा है सर्वत्र, नंदनंदन वृषभानु किशोरी..सुंदर भुवन चतुरदास, सुंदर श्याम राधिका गोरी. जय श्री भट्ट, कहाँ जाऊँ, स्वाद एक नहीं, लाखों हैं.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (58)
राधामाधव अद्भुत जोरीजुगुलकिसोर हमारे ठाकुर