राधामाधव अद्भुत जोरी
Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य
Verse 8 of 29
गौर स्याम अति सोहनी, जोरी परम उदार।
अलिजन आरती करत हैं, छबिहीं निहार निहार॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (46)
गौर स्याम अति मधुर, जोरि अति उदार। अलीजान आरती करती है, छवि देखती है.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (46)