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छीतस्वामी
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हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी
हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी
छीतस्वामी
Pada 10
हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी । भव सागर ते काढे कृपानिधी राखे शरन अपनी ॥१॥ रसना रटत रहत निशिवासर शेष सहस्त्र फनी । छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल त्रिभुवन मुकुट मनी ॥२॥
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