गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये

छीतस्वामी

Pada 11

गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये । तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥ परम पुनीत प्रीति की रीति सब जानिके दृढकरि चरण कमल जु गहिये । छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल, ऐसी निधि छांडि अब कहाँ जु जैये ॥२॥
हमारे श्री विट्ठल नाथ धनीधन्य श्री यमुने निधि देनहारी